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“खुशी का असली पता”✨

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“खुशी मांगने से नहीं, बाँटने से मिलती है” ✨ खुशी ढूंढने वास्ते मैं कहां कहां नहीं गया। अयोध्या, मथुरा, वृंदावन और काशी, बोधगया।। क्या मिली खुशी? यह बात बताना मुश्किल रही। थक हार के जब शांत हुआ तो खुशी मिल गई।।  बेशकीमती है खजाना, इसे पाने का मंत्र जान लो। मत मांगो भीख में तुम इसे, बस खुशी से खुशी का दान दो।। कष्ट पाकर भी गैर के होठों पर मुस्कान दो। बेफिक्र होकर दूसरों को मान और सम्मान दो।। सत्य के सानिध्य में अटूट अपनों को विश्वास दो। पैदा होती मस्तिष्क पटल पर खुशी से चैन की सांस लो।। अहिंसा के साथ चल आगे रास्ता धर्म का। जैसी करनी वैसी भरनी साफ न्याय है कर्म का।।

Ramlala Ki Pran Pratishtha | रामलला की प्राण प्रतिष्ठा पर भावपूर्ण हिंदी कविता | Jai Shri Ram

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#ramlala #rammandir #ramlalasong #ram रामलाला को देख लगा कि राघव हैं तैयारी में। चहरे पर मुस्कान वही जो मुस्कान है बांके विहारी में।। मुझे लगता है कलियुग खत्म हुआ त्रेता का शंखनाद हुआ। भगवान हर्ष से गदगद हैं देख धरा पर जो आज हुआ।। देख राममय भारत को पूरी दुनियां सहम गई। रामलाला की प्राणप्रतिष्ठा में प्रकृति भी कुछ छण ठहर गई।। गर्भगृह स्पंदित था सारी शक्तियों ने दस्तक दी। रामलाला के आने पर देश की सारी हस्तियां नतमस्तक थी।। हर घर की छत पर झंडे थे पूरा देश राममय था। मोदी तो एक माध्यम थे रामलाला का आना तय था।। गौर से देखो रामलाला को नेत्रों में अजीब सी झांकी है। ज्ञानवापी हुआ हमारा मथुरा में कान्हा का आना बाकी है।। Listen On Youtube

Hamesha Galti Pati Ki? | हमेशा गलती पति की – रिश्तों की कड़वी सच्चाई | Hindi Vyangya Kavita

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हमेशा गलती पति की कारण कलेश का कुछ भी हो, चाहे गलती हो किसी की। लेकिन एक मात्र इस रिश्ते में, हमेशा गलती पति की।। गूंथने में किया गीला आटा, दोष पति का क्यों ध्यान बांटा।। खुद गलती की हाथ जलाया, दोष पति का बातों में लगाया। कभी गुस्से में बच्चे ठोंके, दोष, पति ने गुस्सा लगाई। बोतल को बेग में रखना भूलीं, तो आपने क्यों नहीं याद दिलाई।। चलने में खुद टेबल से भिड़ी, जरूर तुमने टेबल पेला होगा। घर की लाइट अगर बैठ गई, तो जरूर तार कोई छेड़ा होगा।। कभी लेट हुई पंचायत में, लौटी जब बाहर बचा कोई मित्र नहीं। पति से बोली मैं चाहे कहीं घूमूं, तुम्हें मेरी कोई फिक्र नहीं।। सब काम टाइम से होता, गर तुम मुझे बाहर नहीं जाने देते। वैसे हफ्ते में कभी कभार जाती हूं, आज काम तुम ही कर लेते।। बच्ची का होमवर्क पड़ा है, जबकि ट्यूशन भी रोज गई थी। गलती तुम्हारी, तुम्हे यही ट्यूशन वाली मिली थी।। ठीक है देवी बच्चे भूखे सो गए, तुमने खाना भी नहीं बनाया। खिला नहीं सकते थे होटल पर, बाहर कोई भूकंप थोड़े ही आया।। खाना नहीं बना तो क्या, बच्चे वैसे कौन सा खाना खाते हैं। सही पूछो तो बच्चे आपने, ला लाकर चॉकलेट बिगाड़े हैं।। मत बो...

Raste Tamam Hain । रास्ते तमाम हैं

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  रास्ते तमाम हैं उस मंजिल तक पहुंचना मुश्किल, जबकि रास्ते तमाम हैं। " नाम, धाम, रूप, लीला" सिर्फ एक का ही काम हैं।। मगर कहां मुक्ति मिलेगी माया के जंजाल से। प्रभु ही बचा सकते हैं, इसकी टेडी चाल से।। भजन पाठ बाद में, पहले काम तमाम हैं। "नाम, धाम, रूप, लीला" सिर्फ एक का ही काम हैं।। मन भी पांसा फेंकता है, रह रह कर भोग के। ऐसे मौके पेश करता, बेवजह सयोंग के।। जो न सोचा आपने, आज उसका भी इंतजाम है। "नाम, धाम, रूप, लीला" सिर्फ एक का ही काम हैं।। कभी लालच में गिरता धड़ाम, सब साधना को भूलकर। ऐसे लपेटती है बेहा, बेशर्म माया मजबूर कर।। गर बचा सकता है कोई, तो सिर्फ वह हनुमान हैं।। "नाम, धाम, रूप, लीला" सिर्फ एक का ही काम हैं।। चल उठ फिर संभाल खुद को, इतनी छूट दी भगवान ने। धोखे पर धोखे दिए, इस मन बेईमान ने।। मन के चक्कर में फंसा तू यूं ही खाम खाम हैं। "नाम, धाम, रूप, लीला" सिर्फ एक का ही काम हैं।। उस मंजिल तक पहुंचना मुश्किल, जबकि रास्ते तमाम हैं। "नाम, धाम, रूप, लीला" सिर्फ एक का ही काम हैं।।

Jhoothi Duniya - Famous Poem 2024

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Jhoothi - Shaan #popularpoetry #famous poem #spritualpoem दूनियां में सब झूठ, सिवा मौत और भगवान के। झू ठा ताव दे रहा, मूंछ पे सीना तान के।। हर रिश्ते का प्यार झूठा, सिवा भगवान की भक्ति के। झूठे सबके अधिकार पावर, सिवा ब्रह्माण्ड की शक्ति के।। झूठी पद प्रतिष्ठा है, झूठी सबकी शान है। जो कहता मैं बात का धनी, वह असल बेईमान है।। नाटक जैसा अभिनय यहां पर, असल भेस कुछ और है। बायदा भूला ब्रह्म का,आज मंजिल कुछ और है।। कलियुग में सिर्फ नाम अधारा, जप नाम भगवान के। मंदिर भी कह रहा और मस्जिद ने पर्दे फाड़े कान के।। झूठा ताव दे रहा, मूंछ पे सीना तान के। दूनियां में सब झूठ, सिवा मौत और भगवान के।।

Naam jaap । महिमा श्री हरि के नाम की

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  महिमा श्रीहरि के नाम की हे! प्रभु यह कैसा भ्रमजाल बना दिया। जिसने जो चाहा उसको उसी में रमा दिया।। आप सर्वशक्तिमान, जीव आप द्वारा पाला जाता। फिर क्यों विमुख होकर, जीव बेचारा भटक जाता। संकल्प ठानता तुम्हें पाने को, मगर फिसल जाता।  यह धूर्त काम, क्रोध, लोभ पटक मार जाता। मन की व्यथा बता कर रोया, फिर मेरे गुरुवर ने समझाया। संकल्प में दृढ़ता लाओ और गुरुमंत्र ही मूल बताया।। गुरु ने ऐसी महिमा गाई 'श्रीहरि' के नाम की। एक 'नाम' मात्र ही सीढ़ी है, मेरे कृष्ण के धाम की।।

mangalsutra ll मंगलसूत्र

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मंगलसूत्र एक नारी ने पति से फरमाया, वायदा करके क्यों नहीं नया मंगलसूत्र बनवाया। तुम कितने झूठे इंसान हो, झूठ बोलते हो कि तुम मेरी जान हो।। कसम से मुझे तुमसे नफरत हो गयी है, तुमसे तो लाख अच्छा पड़ोसिन राधा का पति सही है। जिसने राधा को राधा समझ अर्चना की है, इस बारे में राधा ने मुझे स्वम सूचना दी है।। और एक तुम हद ही कर डाली, नफरत की ज्वाला में संपूर्ण जला डाली । आखिर तुम कैसे इंसान हो धूर्त, क्या बिल्कुल बेशर्म हो क्यों नहीं बनबाते नया मंगलसूत्र।। तुम क्या सोचते हो छूट जाओगे, आखिर त्रिया चरित्र से कहाँ निकल पाओगे। पति की बातें सुनकर दंग रह गया पति, इसने तो आज सब्र की हद ही कर दी ।। आज मंगलसूत्र पुराना हुआ तो उसे बदलवाएगी, कल मेरे लिए बहुत बड़ी मुसीबत आएगी। सायद एक दिन हम उनके लिए पुराने हो जाएंगे, मंगलसूत्र की तरह हम भी बदल दिए जाएंगे।। आज रिश्ता तब तक अटूट है, जब तक पति पत्नियों के इशारे पर नाच रहे हैं। वरना वैबाहिक जीवन आज खासकर चटक रहे हैं।।

Pahalwan news, पहलवान कविता, doshi kaun, pahalwan par kavita dhobi pachhad - kavita kunji

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धोबी पछाड़  कामदेव बड़ा बलवान है पागल कर देता इंसान को। धन्य अध्यक्ष जी, धोबिया पछाड़ उल्टी मार दी पहलवान को।। चलो आरोप झूठ ही सही पर जब तक सच्चाई निकल कर आवेगी। तब तक तुम्हारी इज्जत का पोस्टमार्टम जनता कर डालेगी। देखा नहीं यूट्यूब कैसे बवाल मचा रहा है। दो कोड़ी का इंसान भी अपने को जंतर मंतर पर हीरो बता रहा है।। बस हम पहलवानों के साथ हैं क्या माजरा? पता नहीं। ब्रजभूषण गुंडा पहलवानों की खता नहीं।। फ्री की पब्लिसिटी में लोग न जाने क्या क्या बोल रहे हैं। ये मुद्दा कुछ और है लोग ई वी एम का भी राज खोल रहे हैं।। लगता है इस पूरे कांड में कुछ राजनीति का भी झोल है। मामला स्पष्ट नहीं कुछ तो गोलमोल है।। कोई धडल्ले से बोल रहा है तो कोई मौन है। अगर यह साजिश है तो इसके पीछे कौन है? धरने से न झूठ सच और न सच झूठ साबित हो सकेगा। माननीय सुप्रीम कोर्ट दूध का दूध पानी का पानी जल्द साबित करेगा।। भाई पुलिस की इन्वेस्टिगेशन से तो राम बचाए। मर्डर भरे बाजार में चंदू करता और पुलिस परशुराम बताए।। अच्छा है हम सब और अदालतों से भी ऊपर एक अदालत है। वहां किसी गुंडा माफिया और बाहुबली की नहीं चालत है।। वहां जैसी कर...

56 इंच का सीना, 56 inch ka seena - kavita kunji

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क्या रखा है गिरगिट की तरह जीने में। जरा सामने आके देख क्या छुपा है इस 56 इंची सीने में। मौहलत दी है तुम्हें सुधर जाने की। भूल मत कर हमें अंजमाने की।। सोला हूं पहले जलेगा फिर फटेगा भी। वक्त है पश्चाताप कर वरना मिटेगा भी।। मत कटाक्ष कर दर्द गहरा है। अब भी पाबंदी और पहरा है।। हर रात के बाद सबेरा है। माफी के काबिल नहीं जो गुनाह तेरा है।। अब ऐसा जख्म देंगें कि सात पीढ़ियों तक याद करेगा। मत भूल में रहना प्यारे कि हर बार बाप माफ करेगा।। मतलब परस्त आदमी मत अब रिश्ता बना। जा आज फ़िर से माफ़ किया जाकर खुशियां मना।।

Daru par kavita l Poem On Sharab

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#sharab #poem on sharab #sharabi par kavita शराबियों के प्रकार भिखारी भी दारू पीकर बनता है साहूकार। आज विस्तार से बताता हूं शराबियों के प्रकार।। सन सतनाबे में शराबियों के परीक्षण से आंका गया। शराबियों की किस्म को चार भागों में बांटा गया।। नंबर चार पर प्यार के ठुकराए आशिक आते हैं। घटिया किस्म के शराबी मयखाने में पीने जाते हैं।। ये ज्यादातर कर्जा लेकर के पीते हैं। जिंदगी को एक बोझ समझकर के जीते हैं।। सूची में नंबर तीन पर उन शराबियों का ब्योरा है। हर रोज पी रहे हैं जीवन अधूरा है।। ये लगभग नब्बे फीसदी शादीशुदा हैं। वाकी दस फीसदी शादी के बावजूद बीबी से जुदा हैं।। ये हर रोज दारू पीकर घर आते हैं। दरवाजा अक्सर पड़ोसी का खटखटाते हैं।। नंबर दो की सूची में अक्सर शराबियों की संख्या कम है। इनके दिल में कोई ठेस या फिर कोई गहरा गम है।। ज्यादातर ये लोग जोड़े से पीते हैं। समझकर चार दिन की जिंदगी एंजॉय से जीते हैं।। नंबर एक के शराबियों में अमीर लोग बेशुमार हैं। उद्योगपति, नेता और उच्चाधिकारी और उनका परिवार हैं।। ये दारू, मदिरा, शराब नहीं सोमरस समझ पीते हैं। खुद को कलियुगी देव और धरती को देवलोक समझ ज...

Bewfa Shayari in Hindi - बेवफा शायरी (April 2023)

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    प्यार की निशानी हम प्यार को बेरहम ऐसे न घुटने देंगे। अपने प्यार की निशानी नीलाम न होने देंगे।। मानते हैं दर बदर तुम ढूंढते हो अब हमें। पर अपने दर पर बेवफा हम तुझे न झांकने देंगे।। अपने प्यार की निशानी नीलाम न होने देंगे। हम प्यार को बेरहम ऐसे न घुटने देंगे।। तू दिल बेचती है लालची बोली लगाकर। बहुत पैसा कमाया जिस्म अपना बिछाकर।। अब बफाओं की बस्ती में हम तुझे न बसने देंगे। हम प्यार को बेरहम ऐसे न घुटने देंगे।। पैसे के दम पर घर बसा रहीशों की बस्तियों में। और मंहगा! दिल बिकेगा तेरा,ऊंची हस्तियों में।। वहां बच्चे भी तेरे पढलिख कर उद्योगपति बनेंगे। हम प्यार को बेरहम ऐसे न घुटने देंगे।। पल में क्या से क्या हो जायेगी औकात तेरी। विदेशों में पढ़ने जायेगी औलाद तेरी।। फिर भी लोग बाजार में तुझे खुलेआम न चलने देंगे। हम प्यार को बेरहम ऐसे न घुटने देंगे।। किसी के दिल को घर समझ कर अपना प्यार वसादे। बच्चों को भी बाप बास्ते किसी एक का नाम बतादे।। बरना बच्चे तुझको भी मां कहने से इंकार करेंगे। हम प्यार को बेरहम ऐसे न घुटने देंगे।। ***************************      रिश्ते में ला...

झूठी शान। Jhoothi Shaan। Best hindi poem 2023

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झूठी शान दुख सुख परिवर्तनीय, न रहता एक सदा है। जितना मिला सब्र कर, होता वही जो मंजूर-ए-खुदा है।। क्यों गठरी बांधकर कर, तू कर रहा मेरा मेरा। जबकि जाना कुछ है नहीं, यह सत्य भी तुझे पता है।। मौत को झुठला देना भी, तो एक बड़ा मजाक है। भगवान को सिद्ध करो, यह कितना शर्मनाक है।। आज खुदा का भी सौदा किया, धर्म के ठेकेदारों ने। भगवान की भी बोली लगने लगी, सरेआम बाजारों में।। लोग बिजनेस ठोंक रहे, भगवान के नाम पर। क्या भरोसा करोगे, अब तुम इंसान पर।। अभिमान की बू अब आ रही, इंसान में। सत्य को दरकिनार कर, जी रहा झूठी शान में।। बहुत बुरा अंत होगा, उन सभी बेईमानों का। खुश होता झूठी शान सुन, इसमे क्या दोष है कानों का।। वक्त के रहते संभल, बरना फिर कुछ हासिल न होगा देर में। चिड़ियां चुन कर उड़ जायेंगी, कुछ खक न होगा खेत में।।

Hindi Poems On Life | 5+ Best जिंदगी पर कविताएँ | Hindi Poetry

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ये लोग शहर के ।। Best poem on life जरा सोच जिंदगी को ‘धर्म’, एक पल ठहर के। आगे निकलने की होड़ में, कहां जा रहे ये लोग शहर के? कुछ पाने की चाह में, बहुत कुछ खो रहे। आखिर तेरी चाहत क्या, सोच जरा ठहर के।। आगे निकलने की होड़ में, कहां जा रहे ये लोग शहर के? जरा सोच जिंदगी को ‘धर्म’, एक पल ठहर के।। ढूंढ इस भीड़ में, उस गुरु रूपी नाव को। क्यों डूबना भला, इस गहरी नदी में तहर के।। आगे निकलने की होड़ में, कहां जा रहे ये लोग शहर के? जरा सोच जिंदगी को ‘धर्म’, एक पल ठहर के।। रुक! उस ओर देख, जो देखता तुझको सदां। तू भूला उसके प्रेम को,यहां भौतिकता में बहल के।। आगे निकलने की होड़ में, कहां जा रहे ये लोग शहर के? जरा सोच जिंदगी को ‘धर्म’, एक पल ठहर के।। तू माध्यम से मालिक बना, झूठा बहम पाल कर। तुम तो सिर्फ बुलबुले इस बड़ी नदी की लहर के।। आगे निकलने की होड़ में, कहां जा रहे ये लोग शहर के? जरा सोच जिंदगी को ‘धर्म’, एक पल ठहर के।। वक्त जिसकी देन है, उसके लिए कहां वक्त है? तू व्यस्त होकर बो रहा, बीज जिंदगी में जहर के।। आगे निकलने की होड़ में, कहां जा रहे ये लोग शहर के? जरा सोच जिंदगी को ‘धर्म’, एक पल ठहर के...

चारा घोटाला/ chara ghotala best hindi poem

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चारा घोटाला  लालू की पालतू गाय ने लालू को ललकारा, हमे नहीं खाना आपके घोटाले का चारा। मेरे भाई बहिनों का तुमने पेट काट डाला, घोटाले तो कितने हुए तुम्हारे हिस्से में आया चारा। तुम बदनाम कैसे हो गए इस चारे घोटाले में, लोगों ने तोपें तक बेच दी और आ न सके उजाले में। में हैरान हूं यह सब जानकर, तुमसे तो अच्छे हैं हम नासमझ जानवर। हमने कभी आपका पेट नहीं काटा, सूखी घास से ही पेट भरा कभी मांगा नहीं आटा। अब घोटाले के चारे से हमें बदनाम मत कीजिए, गर इज्जत का नहीं है राशन तो हमें आवारा छोड़ दीजिए।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, beti bachao beti padhao

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गजब की विज्ञान गजब के यंत्र बना डाले। बालक खातिर, तमाम बालिका भ्रूण मार डाले।। किसने दिया अधिकार आपको उन्हें मारने का। क्या इतना भी दम नहीं था उन्हे पालने का।। परिणाम तो भोगने होंगे कुदरत का उसूल है। मेरा कोई क्या करेगा यह अहिंकारमय भूल है।। जीवन एक ड्राइंगशीट, जिंदगी रंगीन इमेज है। तूने रंग भी कपट से भरे,क्या खूब दिमाग तेज है।। एक खातिर दूसरी की बलि चढ़ाई शौक से। निर्दोष चीख चिल्लाती रही तेरे भयावह खौफ से।। For read n enjoy more interesting poems, pls visit my website www.hindicteative.in 🙏

Interesting Poem - मर्द को भी दर्द होता है

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#mard #mardkavita #inerestingpoem             यह कविता एक ऐसे शख्स को समर्पित है। जिसने दुनिया में असंभव को संभव कर दिखाया। और अपने दाम्पत्य जीवन को सुखमय बनाने के लिए, निसंतान अपनी पत्नी के लिए गर्भधारण कर दुनिया के लिए एक मिशाल कायम की। मर्द का दर्द  न पहुंच जाए,किसी को कोई आघात है। खुलकर तो बता दूं,मगर अंदर की बात है।। गर कलम चाहे तो न जाने, क्या क्या लिख डाले। मगर कुछ ज्यादा ही सोचते हैं,कलम से लिखने वाले।। फर्क कुछ ज्यादा हो जाता है,अंदर और बाहर में। जरूर झांक कर देखें,अपने भी यार में।। क्या पता विश्वास की इमारत में कब दरार आए। जिसको वफ़ा समझा जुगों से,वही बेवफ़ा नजर आए।। नहीं कुछ असंभव है आज की सदी में। आलिया नजर आ सकती है आपको गधी में।। आज सवाल उठ रहे हैं मर्दों की मर्दानगी में। नारी बहुत खुश है समलैंगिक शादी में।। प्यार, मोहब्बत,रूठना,मनाना अब इसके लिए वक्त नहीं है। सायद अब नारी को मर्दों की जरूरत भी नहीं है।। सिर्फ नारी ही रहे इस जुग में, गर उसके हो वश में। मर्द बदनाम यूं ही,प्रेमिका भी झूठी खाती है कसमें।। पुरुष तो महान है,क्या नहीं किया नारी...

Best hindi poem - 2023, asmanjas, असमंजस, uljhan - उलझन कविता

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असमंजस मन में एक उलझन है,असमंजस है और द्वंद सा है। किस किस पर यकीन करें,अब तो सोचना भी बंद सा है।। किसी का खुदा,भगवान,ईश्वर तो किसी का निराकार सा है। किसी का सर्वस्व ईशु तो किसी का गुरु ग्रंथ साहब सा है।। बहम सब पाले हुऐ जबकि खुदा सबका एक सा है। किस किस पर यकीन करें, अब तो सोचना भी बंद सा है।। मन में एक उलझन है, असमंजस है और द्वंद सा है। किस किस पर यकीन करें, अब तो सोचना भी बंद सा है।। किसी ने मोछ हेतु कृष्ण को सारी जिंदगी झोंक दी। तो किसी ने पाखंड कर भगवान पर बिज़नेस ही ठोंक दी।। किसी को भक्ति में शक्ति मिली तो किसी की नजर में तमाशा है।। किस किस पर यकीन करें, अब तो सोचना भी बंद सा है।। मन में एक उलझन है, असमंजस है और द्वंद सा है। किस किस पर यकीन करें, अब तो सोचना भी बंद सा है।। मस्त है दुनियां मौज में बस पैसे की भूख है। झूठ की महफिल सझी बस उसी में मसरूक है।। न जाने मजबूरी है या इच्छा बस नजरबंद सा है। किस किस पर यकीन करें, अब तो सोचना भी बंद सा है।। मन में एक उलझन है,असमंजस है और द्वंद सा है। किस किस पर यकीन करें,अब तो सोचना भी बंद सा है।।

Motivational Hindi poems- प्रेरणादायक हिंदी कविता। Best hindi poem । Kavita kunji

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     प्रिय दोस्तो ! अपने जीवन में हर व्यक्ति का लक्ष्य निर्धारित कर जीवन को विकसित करना होता है या यूं कहें कि लक्ष्य प्राप्त कर मन में शांति एवं खुशी पाना होता है। मेरी कविताएं कहीं न कहीं इस मार्ग में आपको प्रेरित कर आपको लक्ष्य तक पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होंगी। लक्ष्य अपने आप को जानो अपनी कमियां ढूंढ सुधार करो। लक्ष्य का पथ मुश्किल हो सकता असंभव नहीं स्वीकार करो।। चल उठ फिर से मत द्वंद पाल, इन बहानों को दर किनार करो। तेरे अंदर जो छुपी हुई उस शक्ति का आह्वान करो।। कोई उम्र नहीं वीरों की होती अपनी शक्ति से प्यार करो। करने के लाखों उपाय मिलेंगे बस अपने को तैयार करो।। सब खेल है इच्छाशक्ति का उठ वीरों सा श्रृंगार करो। जो बुझी पड़ी चिंगारी है उसे फूंक अंगार करो।। घनी समस्या हैं सबकी मार छलांग इन्हे पार करो। शेर की भांति पीछे हटकर पूरी शक्ति से बार करो।। ”धर्मेंद्र” धर्म के पथ पर रहकर नैतिकता स्वीकार करो। कोई कितना भी लालच दे तुमको तृष्णा का इंकार करो।। अपने आप को जानो अपनी कमियां ढूंढ सुधार करो। लक्ष्य का पथ मुश्किल हो सकता असंभव नहीं स्वीकार करो।। ******************...

20+ बच्चों के लिए कविताएं - Hindi Poems for Kids

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         प्रिय पाठको आप सब जानते हो कि बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए मुख्यरूप से मातापिता जिम्मेदार हैं। इसके लिए मातापिता की देखरेख में बच्चों को चार स्किल पर काम करना होता है। ये स्किल हैं:-1. सुनना 2. देखना 3. पढ़ना और 4. समझना लेकिन इसके अलावा मल्टीस्किल पर ध्यान देकर बच्चों का चहुमुखी विकास कर सकते हैं। इसके लिए हमें मुख्यरूप से एक काम करना होगा, बच्चों को कविताएं सुनाकर उनकी समझ को बढ़ाना। यहां पर कुछ कविताएं बच्चों के बौद्धिक विकास को ध्यान में रखते हुए पेश की गई हैं। कंप्यूटर जी / hindi kavita computer par/ best hindi kavita कंप्यूटर जी कंप्यूटर जी तुम हो बड़े महान, नहीं आपके हाथ पैर और नहीं आपके कान। नहीं आप मानव लगते हो नहीं आप में जान, फिर भी झट तुम कर दिखलाते बड़े बड़े से काम। नहीं आप अभिमान दिखाते नहीं दिखाते शान, बिन खाए तुम कैसे जीते क्या तुम हो भगवान। मैं तुम से इक बिनती करता करदो मेरा काम, पापा की तुम शराब छुड़ाओ वो पीते जाम पे जाम। चाय पानी का खर्चा बोलो बोलो और डिमांड, ये काम चुटकी में करदो चाहे कितने भी ले लो दाम। पीछे से पापा ने देखा बड़े ...

असफलता से सीख, asfalta se seekh /safalta kaise payen, सफलता कैसे पाएं - कविता कुंजी

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    आज हमारे बच्चों की आधुनिक जीवन शैली में तनाव आने के कारण उनकी मानसिकता संकुचित होती जा रही है। जिससे सहनशक्ति में वृद्धि के बजाय गुस्सा अधिक आना आमबात हो गई है। मेरी असफलता पर कविता हिंदी में, बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत होगी। निश्चिततौर पर बिद्ध्यार्थी असफलता से सीख लेकर असफलता से सफलता की ओर अग्रसर होंगे। आशा है प्यारे बिद्ध्यार्थियों को असफलता पर कविता हिंदी पसंद आयेगी और उन्हें प्रेरित कर उनके लक्ष्य तक पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होंगी। असफलता निराशा नहीं, बीते कल से सीख है। जो कल गलती बनी, आज सुधार कर, कल निश्चित तेरी जीत है।। मत कोस अपनी संभावनाओं को, यह तो तेरी मीत है। गिरकर उठना बच्चों से सीखो, यह तो कुदरत की रीत है।। क्या भूल गए अब तक कितनी बार गिरे हम, गिरे सैंकड़ों बार उठे हम अंतः पाई जीत है। गिरने वाला ही उठता है, यह परमपिता की नीति है।। असफलता निराशा नहीं, बीते कल से सीख है। जो कल गलती बनी, आज सुधार कर कल निश्चित तेरी जीत है।।

जोरू का गुलाम/joru ka gulam Hindi kavita/ best hindi poem

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जोरू का गुलाम एक दिन एक बच्चा गुस्सा होकर बोला, पापा हम लोगों के बहुत ताने सहते हैं। आज आपको बताना होगा, जोरू का गुलाम किसे कहते हैं? जोरू की ही नहीं बेटा, गुलामी जरूरी है इन तीन की। जीवनपर्यंत गुलामी करें, जर, जोरू और जमीन की।। इन पर आंच न आने दें चाहे जान जाए। इनको टच करने से पहले, उंगली नहीं पूरा हाथ काट दिया जाए।। ये तो इंसान की तरक्की की खान हैं। जोरू का गुलाम बताने बाला, खुद भी बहुत बड़ा गुलाम हैं।। ये तो हमें तुम्हारे दादा, परदादा ने सिखाया। दादा ने दादी की गुलामी कर यहां तक पहुंचाया।। देखा नहीं तुमने दादा से काम बिगड़ने पर, दादी कैसे खींचती थी। पास बिठाकर दादा के कैसे कान ऐंठती थीं।। बेटा नाराज न होना किसी के ताने से। गर्व महसूस कर जोरू का गुलाम बताने से।। जिसके जोरू होगी उसे मजा पता है गुलामी का। जिसे नफरत है जोरू से, वे तांकते हैं दूसरों की और खाते है बेईमानी का।।

Best 10+ Gazals - मशहूर गज़लें

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मायूस जिंदगी क्या नहीं है पास तेरे है परेशान क्यों? आज कर दिया मशीनों ने हर काम तेरा सुलभ, फिर भी बेवजह लगती है थकान क्यों? जिंदगी तो संघर्षों का संगम है ऐ ‘धर्म’। ये तो एक खेल है तू हैरान क्यों? पुरानी रिश्म रिवाजों को तू आज भी जकड़े बैठा है। फिर भी आज ज़माने में है बदनाम क्यों? दर्द की फरियाद को कोई नहीं सुनता यहां। आखिर बहरे हो गए हैं सबके कान क्यों?    ⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐                  अफसोस जब हो गया है पर्दाफाश तो फिर नकाब कैसा? जानबूझ कर ढाए सितम तो अब पछताव कैसा? प्यार में गम देना अदा है तुम्हारी। तो अब अश्क बहाकर यह अफ़सोस कैसा? आज ज़माने में सरेआम हुआ राज ए गुप्तगू। उठ चुके नकाब सारे ,अब है दोष किसका? नादां धर्म प्यार की रस्में निभाता रहा। बेवफा को वफ़ा समझा है मदहोश कैसा? ⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐    दिल की बोली हम प्यार को बेरहम ऐसे न घुटने देंगे। अपने प्यार की निशानी गिरवी न रखने देंगे।। मानते हैं दर बदर तुम ढूंढते हो अब हमें। पर अपने दर पे बेवफा तुझे झांकने न देंगे।। हम प्यार को बेरहम ऐसे न घुटने देंगे। अपने प्...