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Motivational poem - फौजी कोर्स।। Fauji

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 Junior leader course। जूनियर लीडर कोर्स

Bachpan best poem।। बचपन दिल को छू लेने वाली कविता

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चैन की सांसे ले आओ #besthindipoem #kavitakunji #viralpoem Listen On Youtube जीवन की आपाधापी में फिर चैन की सांसे ले आओ। सूनी उन गांव की गलियों में फिर से किलकारी ले आओ।। बचपन के वह गुल्ली डंडा, और खेल कबड्डी ले आओ। बहुत खा लिया पीजा बर्गर, चूल्हे की रोटी ले आओ।। अवसाद झलकता चहरे से वो हंसी होठ पे ले आओ। कोई तो समझो दिल की पीड़ा, मां का मरहम ले आओ।। बहुत हुआ भ्रमण शहरों का चौपाल गांव की ले आओ। पेड़ अभी भी होंगे वहीं पर कोई छांव आम की ले आओ।। स्कूल राह की पगडंडी में वह तपती-दोपहरी ले आओ। रस्ते चलते वह खेल ठिठोरी छीना झपटी ले आओ। । महास्साब की वो गुस्सा और मार छड़ी की ले आओ। अंताछरी की हार जीत और बाल सभा भी ले आओ।। ज्ञान समझ की इस बुद्धि में नासमझी को ले आओ। नहीं चाहिए मुझे फेसबुक मेरी मित्रमंडली ले आओ।। छुपाछुपी और आंख मिचौली कंचा कंकड़ ले आओ। जीवन के इस नीरस पल में महत्वाकांक्षा ले आओ।। नहीं चाहिए मूर्त हकीकत वो सपनों के पल ले आओ। जीवन की आपाधापी में फिर चैन की सांसे ले आओ।।

Pakhand ।। पाखंड पर सर्वश्रेष्ठ कविता

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                          पाखंड मां दुर्गा, शिव, कालिका, तो किसी पे हनुमान प्रचंड। चमत्कार के नाम पर, फलफूल रहा पाखंड।। फलफूल रहा पाखंड दक्षिणा मोटी पाते। लुटने के उपरांत बेचारे फिर नहीं जाते ।। इस घटना का जिक्र नहीं किसी को बतलाते। पड़ोसी भी लूट जाए, इलाज चोखा बतलाते।। लुट जाने के बाद पड़ोसी दोनों मन मुस्काते। फिर तृतीय शिकार को ये दोनों देखो कैसे समझाते।। भाई घंणा होता चमत्कार सभी चकित हो जाते। वहां लंगड़ा करता जंप गूंगे से इंग्लिश बुलवाते।। जाके देख दरबार बदल जायेगी काया। हाथ दबाके पड़ोसी का, फिर आंख मार मुसकाया।। गया बेचारा दरबार मिल गया दल्ला फेरी। कटा पांच हजार की पर्ची, अर्जी पहली तेरी।। जाके बैठ गया दरबार खाली कर अपनी थैली। बाबा ने किया चमत्कार लगा दी अर्जी पहली।। आजा रामभरोसे तेरे घर काली छाया। मरने से तीन बार बचा तू, मौत तेरी निश्चित भाया।। गिर पड़ा बाबा के पैर बचा लो किस्मत मेरी। बाबा ने कान मे कहा, मिला! तू हां में हां मेरी।। चटकी बिल्कुल नहीं, न तो फिर होगा भंगड़ा। बाबा के एक इशारे पर बाउंसर आ गया तंगडा।। फिर ...

Modi And Yogi - Best Poem on Modi And Yogi

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 #poemonmodi #poemonyogi #bestpoemforkids Listen on YouTube भारत का अगला प्रधानमंत्री कौन? आज चर्चा में है चुनाव भारत का, सारे देश हैं मौन चाइना पाक से पूछ रहा, भारत का अगला प्रधानमंत्री कौन।। पाक ने बोला हिंदू छोड़ो, खान भी चाहता चाय बेचने वाले को। भारत फिर से लायेगा, उस छप्पन इंची वाले को। फि र से हवाएं टाइट रहेंगी, मोदी की गारंटी से पीओके पर नजर है उसकी, ले लेगा वह लाठी से।। चाइना तेरी खैर नहीं, तेरे ऊपर बादल पीले से। सावधान, मोदीयोगी से, ये देते, जोर का झटका धीरे से।। जो कहता है वह करता है, यह चाय बेचने वाला। इसको चलो फिर भी झेलें, पर इसका वारिस है, वो विल्डोजर वाला।। सिर्फ खुरापात से वैर है उसका, न हीं वैर पप्पू से। एक सूत्र फॉलो करता वह, नो बेल नो जेल, सीधा मेल प्रभु से।। यूट्यूब पर सुनें

Crafting a Memorable Poem on Kejriwal

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इलेक्ट्रोल बॉन्ड बनाम केजरीवाल #kavitakunji # poem #kejariwal  कुछ लोगों का कहना है, यह कैसा है खेल। इलेक्ट्रोल बॉन्ड चर्चा में था,  हुई केजरीवाल को जेल।। शराब से वृद्धि करने आए, देश की अर्थव्यवस्था। तिहाड़ जेल की टिकट कटी, हालत हो गई खस्ता।। अब मुश्किल बचपाना है, मोदी की गारंटी से। जब तक इलेक्शन जेल रहोगे, फिर छूटोगे गारंटी से।। आईआरएस को छोड़ आपको, ऐसी क्या सूझी। राजनीति के और अलावा, कोई बिजनेस नहीं थी दूजी।। अन्ना जी का लेकर सहारा, दलदल में गए कूद। अब बर्बादी से क्या डरना, खुद हाथ में बारूद।। मोदी के नहीं आगे पीछे, मत लो उनसे पंगा। छप्पन इंची सीना है, पड़ोसी कर दिया नंगा।। Listen poem on Youtube

56 इंच का सीना, 56 inch ka seena - kavita kunji

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क्या रखा है गिरगिट की तरह जीने में। जरा सामने आके देख क्या छुपा है इस 56 इंची सीने में। मौहलत दी है तुम्हें सुधर जाने की। भूल मत कर हमें अंजमाने की।। सोला हूं पहले जलेगा फिर फटेगा भी। वक्त है पश्चाताप कर वरना मिटेगा भी।। मत कटाक्ष कर दर्द गहरा है। अब भी पाबंदी और पहरा है।। हर रात के बाद सबेरा है। माफी के काबिल नहीं जो गुनाह तेरा है।। अब ऐसा जख्म देंगें कि सात पीढ़ियों तक याद करेगा। मत भूल में रहना प्यारे कि हर बार बाप माफ करेगा।। मतलब परस्त आदमी मत अब रिश्ता बना। जा आज फ़िर से माफ़ किया जाकर खुशियां मना।।

चारा घोटाला/ chara ghotala best hindi poem

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चारा घोटाला  लालू की पालतू गाय ने लालू को ललकारा, हमे नहीं खाना आपके घोटाले का चारा। मेरे भाई बहिनों का तुमने पेट काट डाला, घोटाले तो कितने हुए तुम्हारे हिस्से में आया चारा। तुम बदनाम कैसे हो गए इस चारे घोटाले में, लोगों ने तोपें तक बेच दी और आ न सके उजाले में। में हैरान हूं यह सब जानकर, तुमसे तो अच्छे हैं हम नासमझ जानवर। हमने कभी आपका पेट नहीं काटा, सूखी घास से ही पेट भरा कभी मांगा नहीं आटा। अब घोटाले के चारे से हमें बदनाम मत कीजिए, गर इज्जत का नहीं है राशन तो हमें आवारा छोड़ दीजिए।

Best 10+ Gazals - मशहूर गज़लें

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मायूस जिंदगी क्या नहीं है पास तेरे है परेशान क्यों? आज कर दिया मशीनों ने हर काम तेरा सुलभ, फिर भी बेवजह लगती है थकान क्यों? जिंदगी तो संघर्षों का संगम है ऐ ‘धर्म’। ये तो एक खेल है तू हैरान क्यों? पुरानी रिश्म रिवाजों को तू आज भी जकड़े बैठा है। फिर भी आज ज़माने में है बदनाम क्यों? दर्द की फरियाद को कोई नहीं सुनता यहां। आखिर बहरे हो गए हैं सबके कान क्यों?    ⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐                  अफसोस जब हो गया है पर्दाफाश तो फिर नकाब कैसा? जानबूझ कर ढाए सितम तो अब पछताव कैसा? प्यार में गम देना अदा है तुम्हारी। तो अब अश्क बहाकर यह अफ़सोस कैसा? आज ज़माने में सरेआम हुआ राज ए गुप्तगू। उठ चुके नकाब सारे ,अब है दोष किसका? नादां धर्म प्यार की रस्में निभाता रहा। बेवफा को वफ़ा समझा है मदहोश कैसा? ⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐    दिल की बोली हम प्यार को बेरहम ऐसे न घुटने देंगे। अपने प्यार की निशानी गिरवी न रखने देंगे।। मानते हैं दर बदर तुम ढूंढते हो अब हमें। पर अपने दर पे बेवफा तुझे झांकने न देंगे।। हम प्यार को बेरहम ऐसे न घुटने देंगे। अपने प्...

Political Poems

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बिल्ली की हेकड़ी  दिल्ली के चिड़ियाघर में, एक घटना देखने में आयी। इंडियन बिल्ली चीनी तेंदुए पर घुर्रायी।। बंदी तेंदुए को उसने खरी खोटी सुनाई। तेंदुए को अपनी मर्दानगी पर शर्म आयी।। मौका पाकर भारती की तरह बोलती गयी। उल्टा तेंदुए को माफी मांगने को कही।। तेंदुए की समझ में यह रास न आया। आखिर क्यों बेवजह मुझे जा रहा डरा धमकाया।। आखिर आज राज कुछ और था। बिल्ली का कटघरा अमेरिकन शेर के पास था।। उसके ऊपर शेर का हाथ था। पाक-चीन की राजनीति का पर्दाफाश था।। बोली तेरा मूक रहना फिलहाल अच्छा है। मेरे पास आज शक्ति की समुचित मात्रा है।। धमकी सुनकर तेंदुए ने इंग्लिश के बोले वर्ड। “यू आर कैट डोंट फॉरगेट आइ एम लेपर्ड” इंग्लिश सुनकर बिल्ली शरमा गयी। तुरंत नियंत्रित होकर गरमा गयी।। तू मुझे मत समझ बिल्ली मेरी बहुत दूर तक पहुंच है। मैं गट्टी हूं तो क्या तेरी पूंछ जितनी लंबी मेरी मूंछ है।।

Sharabi - hindi - kavita l शराबी

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यह कविता एक ऐसे शराबी व्यक्ति को समर्पित है जो एक दिन मित्रों की पार्टी में कुछ लिमिट से ज्यादा पेग पी लेता है। बाद में जब नशा अपनी चरमसीमा पर आता है। और ज़मीन घूमती हुई नजर आती है। तो वह ‘शराबी-अंदाज़’ में भगवान से जो प्रार्थना करता है। उस प्रार्थना को यह कविता बयां कर रही है। आज मुझे बचाले पिला गया वह साला। कल से नहीं पियूंगा मैं शराब का प्याला।। उसने खुद कम मुझे ज्यादा पिलाई। हर पेग पीने को उनकी सौगंध दिलाई।। ऐसा हर शराबी का बयां होता है । पीने के बाद दुनियादारी का ज्ञान होता है।। इसी घटना वाबत कल अचानक आया फोन। मिस्टर ‘यादव’ “योर बेस्ट फ्रेंड एक्सपायर” प्लीज कम सून।। जब मैं वहां पहुंचा तो अलग हाल था। मेरा दोस्त नशे में बेहोश और बेहाल था।। मैंने कहा दोस्त यह क्या माजरा है। तू हो गया पागल, पागलखाना आगरा है।। तुरंत उठाकर उसको ले चले आगरा। जिंदा पर ही कफन का उड़ाया चादरा।। रास्ते में जैसे ही रामबाग आया। गाड़ी रुकवाकर वह जोर से चिल्लाया।। बोला अरे! मेरे यारो, कुछ याद आ रहा है। शायद आगे ठेका देशी शराब आ रहा है।। ज्यादा नहीं एक ठर्रा बोतल लूंगा । कर्म खराब रहे अपने, खुदा को रिश्वत दूंगा।।

हिंदी कविता सच्चा संत वही होता है | Hindi Kavita Sachha Sant - kavita kunji

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संत और राजनीति  संतों की गरिमा को यह सरासर ठेस है। राज भोग ही करना है तो क्यूँ सन्यासी का भेष है।। मानते हैं कलयुग में सब सरासर जायज है। सत्य का मर्डर हुआ धर्म अपाहिज है।। सत्यबाणी, मुक्ति, मोक्ष, संतो का कार्य है। बर्ना राजनीति में संत?. इसमें झूठ तो अनिवार्य है।। सब कुछः इस कलयुग में उल्टा ही उल्टा है। कर्म , धर्म, संयम पर सिर्फ यादव ही टिका है।। कुछः लोग सक्ति हीन करते हैं, हमें भावना में बहाकर। बर्ना सक्ति प्रदर्शन द्वापर में भी दिखाया गोवर्धन पर्वत को ऊंगली पर उठा कर।। (नोट : इस कविता का भाव किसी की ब्यक्तिगत छवि को ठेस पहुंचाना नहीं है, और यादव शब्द का इस्तेमाल भगवान श्री कृष्ण के पक्ष में किया गया है।)

Jan Lokpal Bill ।। जन लोकपाल बिल। kavita kunji

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#viralpoem #janlokpal #anna #janlokpalbill जनलोकपाल ।। Janlokpal सत्ता और जनतंत्र में बस एक अदा पाई गयी। रामलीला मैदान में बारह दिन सच की खाल खिंचवायी गयी।। सत्ता में बैठे सियासती रसिया लोग हँसते रहे।  थोथले मुँह फालतू संसद में बकते रहे।।  किसी ने अन्ना पर तो किसी ने टीम पर निशाना साधा। ‘बी जे पी’ दूल्हा की मौसी बन उठा रही थी फायदा।। अंततः सरकार घुटने टेक सामने आयी। अग्निवेश जी महाराज ने दोहरी भूमिका निभायी।। अन्ना के हर वायदे पर सरकार हाँ भरती गयी। खिलाफ जनता के वास्ते एक नयी चाल चलती गयी। चंद लम्हों बाद उस पर धुंध सी छाने लगी। जनलोकपाल के तीन बिंदुओं पर खोर खाने लगी।। सोनिया जी फोन पर मनमोहन को समझाने लगी। अन्ना की खिदमतगीरी वाकी को फ़साने लगी।। अन्ना काबिलेतारीफ बेफ़िक्र सीढ़ियां चढ़ता गया। अहिंसा की राह पर बंदेमातरम कहता गया।। बारह दिन भूखा रहा तीक्ष्ण तपती धूप में।           आज देश नमन करता उसे गाँधी के रूप में।।