“AI तस्वीर बदल सकता है, तकदीर नहीं | जब दादा ने AI से माँगा दादी के दिल का प्यार ❤️”
ए.आई. तस्वीर बदल सकता है, तक़दीर नहीं Listen On Youtube #AI तस्वीर बदल सकता है, तकदीर नहीं। यह भावुक हिंदी कविता AI और इंसानियत के रिश्ते पर एक गहरा संदेश देती है। दादा-दादी के हास्यपूर्ण संवाद से शुरू होकर कविता रिश्तों, माँ-बाप, प्रेम, अपनापन और संवेदनाओं की अहमियत समझाती है। देखो दादा! आप इक्कीस के और दादी सोलह साल की बना दी, आपको कोट-पैंट और दादी को साड़ी पहना दी। पुत्तर! यह कैसे कर दिया, मुझे भी बता दे, मुझमें अंदर से इश्क़ और दादी में प्यार जगा दे। नहीं दादा! इतना नहीं हो पाएगा, तो फिर पुत्तर तेरा ये “ए.आई.” मेरे किसी काम नहीं आएगा? मेरा गौरी चमड़ी, भरी जवानी और हुस्न से क्या काम, तेरी दादी के आगे बैठा हूँ, फिर भी हूँ नाकाम। तस्वीर बदलने से अंदर के जज़्बात बदलेंगे थोड़े ही ना, मैं शरीफ़ दिख रहा हूँ तस्वीर में, फिर भी तेरी दादी गुस्सा छोड़ेंगी थोड़े ही ना! तूने बाल काले कर दिए, झुर्रियाँ सारी मिटा दीं, चेहरे पर जवानी की चमक भी खूब सजा दी। मगर सब पर पानी फेर, देखा! तेरी दादी ने क्या जवाब दिया— “इस चमगादड़ को सजाने में किसने वक्त बर्बाद किया?” अब तो हद हो गई पुत्तर, “ए.आई.” से कह कु...