Best Poem On Sharab - एक शराबी की दिल झकझोर देने वाली कविता
मदिरा ज्ञान Listen on Youtube - यह कविता यूट्यूब पर सुनें किसी को खुश मिजाजी में, तो किसी को ग़म में जरूरी है। बिना मदिरा के ऐ- साहिब, भरी महफिल अधूरी है।। भिखारी से मंत्री तक, यह सब को प्यारी है। पहले मर्द ही पीते थे, अब तो इसकी भी ग्राहक नारी है।। कोई पंच सितारे में पीता, तो कोई ठेके में जारी है। क्या गज़ब की चीज़ है, किसी की जान है तो किसी की हत्यारी है।। बिना इसके रात तन्हा, दिन लगता भारी भारी है। बेस्वाद है कमबख्त, फिर भी ललचाती जीभ बेचारी है।। क्या गज़ब दम रखती, आती प्यार की खुमारी है। दो पेग में ही साहिब, लगती साठसाला कुंवारी है।। दो पेग में खंण्डन, करता गीता के श्लोकों का। तीन में मोदी भी नोकर, खुद मालिक तीनों लोकों का।। कुबेर का भंडार खुलता है, सौदा करता तोपों का। तो कभी प्रेमिका से कहता, बोल बिस्तर लगादूं नोटों का।। जिंदगी चार दिन की, क्या रखा है घुट घुट के जीने में। ग़म भुलाती है ये दारू, दिल में छिपीं गहरी चोटों का।। धन्य है! तू मर्ज है, और दबाई भी। ढक्कन खुला तो बर्बाद...