Interesting Poem - मर्द को भी दर्द होता है
#mard #mardkavita #inerestingpoem यह कविता एक ऐसे शख्स को समर्पित है। जिसने दुनिया में असंभव को संभव कर दिखाया। और अपने दाम्पत्य जीवन को सुखमय बनाने के लिए, निसंतान अपनी पत्नी के लिए गर्भधारण कर दुनिया के लिए एक मिशाल कायम की। मर्द का दर्द न पहुंच जाए,किसी को कोई आघात है। खुलकर तो बता दूं,मगर अंदर की बात है।। गर कलम चाहे तो न जाने, क्या क्या लिख डाले। मगर कुछ ज्यादा ही सोचते हैं,कलम से लिखने वाले।। फर्क कुछ ज्यादा हो जाता है,अंदर और बाहर में। जरूर झांक कर देखें,अपने भी यार में।। क्या पता विश्वास की इमारत में कब दरार आए। जिसको वफ़ा समझा जुगों से,वही बेवफ़ा नजर आए।। नहीं कुछ असंभव है आज की सदी में। आलिया नजर आ सकती है आपको गधी में।। आज सवाल उठ रहे हैं मर्दों की मर्दानगी में। नारी बहुत खुश है समलैंगिक शादी में।। प्यार, मोहब्बत,रूठना,मनाना अब इसके लिए वक्त नहीं है। सायद अब नारी को मर्दों की जरूरत भी नहीं है।। सिर्फ नारी ही रहे इस जुग में, गर उसके हो वश में। मर्द बदनाम यूं ही,प्रेमिका भी झूठी खाती है कसमें।। पुरुष तो महान है,क्या नहीं किया नारी...