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Interesting Poem - मर्द को भी दर्द होता है

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#mard #mardkavita #inerestingpoem             यह कविता एक ऐसे शख्स को समर्पित है। जिसने दुनिया में असंभव को संभव कर दिखाया। और अपने दाम्पत्य जीवन को सुखमय बनाने के लिए, निसंतान अपनी पत्नी के लिए गर्भधारण कर दुनिया के लिए एक मिशाल कायम की। मर्द का दर्द  न पहुंच जाए,किसी को कोई आघात है। खुलकर तो बता दूं,मगर अंदर की बात है।। गर कलम चाहे तो न जाने, क्या क्या लिख डाले। मगर कुछ ज्यादा ही सोचते हैं,कलम से लिखने वाले।। फर्क कुछ ज्यादा हो जाता है,अंदर और बाहर में। जरूर झांक कर देखें,अपने भी यार में।। क्या पता विश्वास की इमारत में कब दरार आए। जिसको वफ़ा समझा जुगों से,वही बेवफ़ा नजर आए।। नहीं कुछ असंभव है आज की सदी में। आलिया नजर आ सकती है आपको गधी में।। आज सवाल उठ रहे हैं मर्दों की मर्दानगी में। नारी बहुत खुश है समलैंगिक शादी में।। प्यार, मोहब्बत,रूठना,मनाना अब इसके लिए वक्त नहीं है। सायद अब नारी को मर्दों की जरूरत भी नहीं है।। सिर्फ नारी ही रहे इस जुग में, गर उसके हो वश में। मर्द बदनाम यूं ही,प्रेमिका भी झूठी खाती है कसमें।। पुरुष तो महान है,क्या नहीं किया नारी...

Best hindi poem - 2023, asmanjas, असमंजस, uljhan - उलझन कविता

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असमंजस मन में एक उलझन है,असमंजस है और द्वंद सा है। किस किस पर यकीन करें,अब तो सोचना भी बंद सा है।। किसी का खुदा,भगवान,ईश्वर तो किसी का निराकार सा है। किसी का सर्वस्व ईशु तो किसी का गुरु ग्रंथ साहब सा है।। बहम सब पाले हुऐ जबकि खुदा सबका एक सा है। किस किस पर यकीन करें, अब तो सोचना भी बंद सा है।। मन में एक उलझन है, असमंजस है और द्वंद सा है। किस किस पर यकीन करें, अब तो सोचना भी बंद सा है।। किसी ने मोछ हेतु कृष्ण को सारी जिंदगी झोंक दी। तो किसी ने पाखंड कर भगवान पर बिज़नेस ही ठोंक दी।। किसी को भक्ति में शक्ति मिली तो किसी की नजर में तमाशा है।। किस किस पर यकीन करें, अब तो सोचना भी बंद सा है।। मन में एक उलझन है, असमंजस है और द्वंद सा है। किस किस पर यकीन करें, अब तो सोचना भी बंद सा है।। मस्त है दुनियां मौज में बस पैसे की भूख है। झूठ की महफिल सझी बस उसी में मसरूक है।। न जाने मजबूरी है या इच्छा बस नजरबंद सा है। किस किस पर यकीन करें, अब तो सोचना भी बंद सा है।। मन में एक उलझन है,असमंजस है और द्वंद सा है। किस किस पर यकीन करें,अब तो सोचना भी बंद सा है।।