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दुनिया में क्या सही और क्या गलत है? Kya galat- kavita kunji

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क्या गलत ।। Kya galat दवा ग़लत बड़े बीमारी। वाहन ग़लत रोए सवारी।। संगत ग़लत बिगड़े ब्रह्मचारी। विचार ग़लत बदनाम संसारी।। गुरू ग़लत जीवन की ख्वारी। पति ग़लत दुखी हो नारी।। प्रेमी ग़लत दुखी प्रेम प्यारी। अधीनस्थ ग़लत दुखी अधिकारी।। सरकार ग़लत दुखी जनता सारी। परीक्षा ग़लत असफल तैयारी।। संतान ग़लत पिता दुखारी। राह ग़लत बिगड़े दुनियादारी।। नमक ग़लत बेस्वाद तरकारी। मालिक ग़लत परिवार की ख्वारी।। जीवन दुखमय अगर भ्रष्ट है नारी। आचार ग़लत रुष्ट त्रिपुरारी।।

बचपन हिन्दी कविता/hindi poem on bachapan/hindi poem on life/kavita kunji

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       हर किसी की जिंदगी में बचपन के दिनों का एक अजीब अहसास होता है । मगर हम सब अपने बचपन में बहुत जल्दी बड़े होने के सपने देखते हैं। जबकि बड़े होकर लगता है कि बचपन के क्या खूब दिन थे जो हमने ब्यर्थ ही गुजार दिए । जिन्हें हिंदी कविता ‘बचपन’ बयां कर रही है। बचपन   जब याद आता है , सबको अपना बचपन । सोचता मैंने यूं ही, खो दिया अपना लड़कपन।। शरारती बन मां को, मैं रुलाता रहा। लोग  समझाते रहे, मशवरे मैं ठुकराता रहा।। कभी साथियों से झगड़ा, तो कभी उन्हें मनाता रहा। लोग डांटते रहे, मैं मुस्कराता रहा। कभी घर बना के रेत के, मैं  लुभाता रहा। ना  समझी में भी, समझदारी दिखाता रहा।। कभी सारे दिन, धूप में पतंग उड़ाता रहा। भूख मुझको लगी, दिल मां का दुखता रहा।। हर ग़म से परे मेरा बचपन रहा। कब बीतेे वे दिन एक स्वपन रहा।। अब खिलकर बन गया सुमन, जो कभी था शबनम। क्या फिर नसीब हो सकेगा, वह  मेरा बचपन?

Manikarnika hindi kavita/kangna ranaut/ manikanika-kavita kunji

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नारी से पंगा ऐसी क्या आवश्यकता थी, उद्धव तुझको ऊधम की। मुंबई कंगना नहीं आपायेगी, उड़ गयीं धज्जियां धमकी की।। क्यूं पंगा ले बैठा तू, ऐसी पंगेवाली से। कभी कोई संग्राम न होता, एक हाथ की ताली से।। नहीं कभी कोई जीता, सर्वत्र पूज्यते नारी से। कालिदास बना उद्धव, खुद डाली काटी कुल्हाड़ी से।। इतिहास गवाह है अब तक का, बर्वादी हुई एक गाली से। पतन का कारण बना हमेशा, जिसने पंगा लिया एक नारी से।। कायरता का काम किया, तुलना करते वीर शिवाजी से। पीठ के पीछे वार किया, घर ढाया है गद्दारी से।। लोकतंत्र की उड़ी धज्जियां, फिर से रावण राज करे। ऐसा राजा मर जाना अच्छा, जो अपनी प्रजा पर वार करे।।

#Bada Hi Mahtva Hai । बड़ा ही महत्व है #कविता एक अलग अंदाज में

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बड़ा ही महत्व है फिल्मों में एक्टर का, वाहनों में ट्रैक्टर का। चकबंदी में सेक्टर का, बड़ा ही महत्‍व है ।। पढ़ाई में ट्यूशन का, द्रक्तों में शीशम का। वाहनों मे थ्री टन का, बड़ा ही महत्व है।। रिश्ते में माँ का, शरीर में जां का । फौजी हुक्म में हां का, बड़ा ही महत्व है। । पैट्रोलिंग में कम्युनिकेशन का, लड़ाई में इम्युनेशन का। सीमा पर डॉमिनेशन का, बड़ा ही महत्व है।। घर में सफाई का ,गिनती में इकाई का। सेना में सिपाही का ,बड़ा ही महत्व है।। सवारी में साइकिल का, वेरट में हायकल का। डांसिंग में मायकल का, बड़ा ही महत्व है।। संसद में प्रधानमंत्री का, पोस्ट में संतरी का। हाउस क्लीयरेंस में एंट्री का, बड़ा ही महत्व है।। इलेक्शन में सपोट का, लास्ट एक वोट का। एक हजार के नोट का, बड़ा ही महत्व है।। यात्रा में भाड़े का, सलवार में नाड़े का। रंगों में काले का, बड़ा ही महत्व है।। सब्जी में आलू का, जानवर में भालू का। रिश्ते में साडू का, बड़ा ही महत्व है।। ससुराल में साली का, होठ पर लाली का। सभा में ताली का, बड़ा ही महत्त्व है।। बूट में लेस का, टॉर्च में सैल का। केस में बहस का, बड़ा ही महत्व है।। कॉपी में सा...

गलतफहमी को दूर करने के तरीके/ pati patni ki galat fehmi

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हर गुनाह की दुनियां में सजा नहीं होती। कमबख्त इस बहम की भी कोई दवा नहीं होती।। आखिर क्या दवा दोगे किसी को गलतफहमी की। गुनाह जो पहले कर बैठे, जो विश्वास में कमी की।। उन्हें हर बोल मे मेरे, झूठ हर दफा नज़र आया । आंखे बुखार से लाल थी, मगर उन्हें तो नशा नजर आया।। अब तो विज्ञान कोई ऐसा यंत्र बना दे । जो गलतफहमी की जांच कर, उसकी सत्यता बता दे।। भगवान तक न बच सके, तो यह कैसे छोड़े इंसान को। सीता को घर से निकाला, गलतफहमी हुई श्रीराम को।। आज आत्महत्या के कारणों में गलतफहमी भी खास है। मात्र एक दवा है इसकी, वह दोस्तो सिर्फ विश्वास है।। वह दोस्तो सिर्फ विश्वास है, वह दोस्तो सिर्फ विश्वास है..

मास्क हिंदी कविता / best poem on corona/कोरोना हिंदी कविता / kavita kunji

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मास्क  गजब का कहर है कोरोने का। अब भाव भी गिर चला सोने का ।। लोग दूर हटते जा रहे माया से। अब दौलत किस काम जब नाता ही न रहेगा काया से।। अब भी घड़ी है कारोना को मात देने की। मास्क पहनो आदत डाल लो अकेले रहने की।। कुछ लोग जानकर भी आज लापरवाह बने हैं। जबकि श्री कृष्ण खुद मास्क पहने संदेश देने खड़े हैं।। मास्क ही है जो बचाएगा अनमोल जान को। आज स्वर्ग में भी है हलचल कैसे बचाएं इंसान को।। खुद देवता भी आए हैं कॉरॉना की चपेट में। नारद भी हुए संक्रमित, बिन मास्क के देखे गए, गंगा किनारे रेत में।। अब भी वक्त है मानव होश में आओ। कुछ लगे तो त्वरित जांच करबाओ।।

जिंदगी का मकसद

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मन भंवरे की तरह उड़ता रहा, उसे तो हमने कभी रोका ही नहीं। यह सब छूट जाना है, यहीं इस धरा पर, यह विचार कमबख्त मैंने सोचा ही नहीं।। हम सब लगे पड़े हैं करने संचयन बस्तुओं का, जो आज नहीं तो कल मेरा है ही नहीं। कुछ ज्यादा ही बढादी हमने मन – तन की ज़रूरतें, जबकि रोटी, कपड़ा और मकान छोड़ और किसी कि जरूरत है ही नहीं।। हम नरसंहार तक उतारू हैं सिर्फ अपनी वाह वाह के वास्ते, जबकि कर्मों के अलावा साथ कोई चीज जानी नहीं। कुछ देश भय दिखा रहे परमाणु बम का, कोरोना के चलते अब किसी बम की जरूरत ही नहीं।। जिंदगी के कुछ पल जियो अपने वास्ते, वरना पछताने के अलावा अब कुछ बचा ही नहीं। मानव विनाश हो रहा आज कोरॉना के बहाने, कहीं श्रृष्टि के प्रलय का कोई समाचार तो नहीं।।