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सब्र - Sabr Patience - kavita kunji

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सब्र सब्र कर बंदे ये दिन भी गुजर जायेंगे।   हंसी करने वालों के चेहरे उतर जायेंगे।।  यूं दिल को दुखा मत उनकी वजह से। आखिर तुझे छोड़ वो किधर जायेंगे।। हंसी करने वालों के चेहरे उतर जाएंगे। सब्र कर बंदे…….   कब तक जुल्म ऐसे ढाते रहेंगे। किस हद तक बेरहम सताते रहेंगे।। तू शिकायत उनकी मत कर किसी से  वे खुद व खुद जालिम सुधर जाएंगे।। हंसी करने वालों के चेहरे उतर जाएंगे। सब्र कर बंदे…….  तू अकेला ज़माने से क्या लड़ सकेगा। जो तेरे अपने है उनका तू क्या कर सकेगा।। ज़ख्म देकर भले बनना, है काम उनका। मगर ये शख्स खुद व खुद सुधर जायेंगे।। हंसी करने वालों के चेहरे उतर जाएंगे। सब्र कर बंदे…….

हिंदी कविता सच्चा संत वही होता है | Hindi Kavita Sachha Sant - kavita kunji

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संत और राजनीति  संतों की गरिमा को यह सरासर ठेस है। राज भोग ही करना है तो क्यूँ सन्यासी का भेष है।। मानते हैं कलयुग में सब सरासर जायज है। सत्य का मर्डर हुआ धर्म अपाहिज है।। सत्यबाणी, मुक्ति, मोक्ष, संतो का कार्य है। बर्ना राजनीति में संत?. इसमें झूठ तो अनिवार्य है।। सब कुछः इस कलयुग में उल्टा ही उल्टा है। कर्म , धर्म, संयम पर सिर्फ यादव ही टिका है।। कुछः लोग सक्ति हीन करते हैं, हमें भावना में बहाकर। बर्ना सक्ति प्रदर्शन द्वापर में भी दिखाया गोवर्धन पर्वत को ऊंगली पर उठा कर।। (नोट : इस कविता का भाव किसी की ब्यक्तिगत छवि को ठेस पहुंचाना नहीं है, और यादव शब्द का इस्तेमाल भगवान श्री कृष्ण के पक्ष में किया गया है।)

वीरता हिंदी कविता/best hindi poem on veerta/best motivational poem on veerta/kavita kunji

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          HindiCreative.in की कविताएँ  कट पेस्ट वाली कविताएँ न होकर सच्ची /यूनीक कविताएँ होती हैं, जिन्हें समझने के लिए पाठक को थोड़ा सा अपना बहुमूल्य समय और बुद्धि दोनों खर्च करने होंगे। इसी श्रंखला में आज एक और वीर रस का भाव लिये नयी  कविता ।       वीर रस में कविता परिस्थिति से मुँह मोड़, आज क्यों उदास बैठे हो।  धिक्कार आपको, खुद को वीर शिवाजी कहते हो।।  वीर हो तो वास्ता रखो जंग से।  न तो पाकिस्तान जाओ, भारत में क्यों रहते हो।।  बुजदिलों की जगह कहाँ मेरे हिन्दुस्तान में।  जीना है तो जिओ शान से, न तो हिन्दुस्तानी क्यों कहते हो।।  गर्व की बात है पैदा होना हिन्दुस्तान में।  यह देश है श्री राम का जिस देश में तुम रहते हो।।  यहाँ मर्द नहीं नारियों ने भी, जौहर कर दिखाए।  जिन्हें पद्मिनी, दुर्गावती और झाँसी की रानी कहते हो।।  हर वक्त हर दफा है प्रथम स्थान देश का।  इस लक्ष्य के साथ जीता है जो, तुम उसे वीर सैनिक कहते हो।  अपनी जान की न परवाह इसे न मोह परिवार से।  जान देता...

Zakhm, जख्म - hindi kavita kunji

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अंदाजा कौन सा वो जख्म था, जो तरो व ताजा न था। जिंदगी में इतने ग़म थे, जिनका कोई अंदाज़ा न था।। हम निकलते भी तो कैसे, बेवफ़ाओं की भीड़ से। सिर्फ दीवारें ही दीवारें थीं कोई दरवाजा न था।। उनकी आंखों से नमाया थी, मोहब्बत की चमक। मगर हमें ही चेहरा पढ़ने का लिहाजा न था।। अरिस उनकी झील सी आंखों का, इसमें क्या कसूर डूबने वालों का। उनकी मासूमियत का क्या दोष, हमें ही खुद गहराई का अंदाज़ा न था।।