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तानाशाही हिंदी कविता/Dictatorship/tanashahi kya hai/tanashahi shasan/tanashahi aur loktantra ko samjhaie/tanashahi ka arth

कोई तो मतलब बतालाये, अभिब्याक्ति अज़ादी का। चोर को चोर कहा अगर तुमने, नंबर है बर्वादी का।। रामराज्य की करी कल्पना, चल रहा जंगलराज वहां। सेना के सेनापति पिट रहे, नारी का अपमान वहाँ।। आखिर क्या हो गया देश को, हो गए मूंक बधिर सभी। आज सेना का लाचर सिपाही, जो था सरहद का वीर कभी।। पीओके सा शहर लग रहा, नहीं सुरक्षित लोग वहाँ। खुल्लम खुल्ला गुंडागर्दी, कानून ब्यवस्था नहीं वहाँ।। न्यायपालिका दासी लगती,  तानाशाह सरकारें हैं। जो जिम्मा लिए सुरक्षा का, वे खुद लगते हत्यारे हैं।। अब कहाँ शिकायत करें नागरिक, थाने में अपराधी हैं। जो नेता चुनकर दिल्ली भेजे, वे बन गए जल्लादी हैं।।

ऑनलाइन शिक्षा का महत्व/online shiksha ka mahatva/online shiksha/online shiksha/online shiksha ke labh aur hani/online shiksha aur samsya-hindi kavita

क्या सीखे तुम, क्या कुछ भूले, इस ऑनलाइन की शिक्षा से । बच्चों की तत्परता देखो, खुद जल्दी पढ़ते इच्छा से।। मोबाइल की ऐसी लगन लगी है, कुछ पढ़ते कुछ टरकाते हैं। शुरुआत तो अच्छी करते, फिर पबजी में घुस जाते हैं।। याददाश्त की नहीं जरूरत, गूगल बाबा जिंदाबाद। युगों पुरानी घटनाएं, समय के साथ दिखाता आज।। कुछ नहीं छुपा है अब इससे, हर तरह का यह भंडारण है। छात्रों की स्रजन क्षमता का, यह मुख्य पतन का कारण है।। संस्कार सब गायब लगते, अनुशासन लुप्त हुआ सा है। ऑनलाइन से जीवन में, कहीं खाई कहीं कुआ सा है।। नहीं जरूरत प्राइमरी तक, ऑनलाइन की शिक्षा की। खेल में बच्चे को समझाओ, मानसिकता समझो बच्चा की।।

हार जीत हिंदी कविता/haar jeet hindi poem/best hindi poems/best motivational poems

  हार व जीत हार कभी सोचा नहीं, जिंदगी में जीत ही मंजूर थी । यह मेहनत का फल कैसा, मेरी जिन्दगी झकझोर दी।। कोई गुनाह बताये मेरा, आखिर क्या  मेरी भूल थी।  मेहनत ही इतनी की, कि हार से बहुत दूर थी।।  मैं हार नहीं सकती, उसे तो हार भी कबूल थी। आज दर्द-ए-ग़म हार का, वह मरने को मजबूर थी।।  सितम कभी ऐसे, कमबख्त आयेंगे सोचा नहीं।  ख़ुदा की करनी, आखिर   क्यों मुझे नामंजूर थी।।   जो नफरत की निशां थी, वह आज सबकी नूर थी।।  हर बार मैं ही जीतूंगी, यह एक मेरी भूल थी। यह मेहनत का फल कैसा, मेरी जिन्दगी झकझोर दी।। हार कभी सोचा नहीं, जिंदगी में जीत ही मंजूर थी। सब कुछ मेरे अनुसार होगा, एक यही तो मेरी भूल थी।  चोट लगी है दिल पर, आज मेहनत भी फिजूल थी।  हार से भी मैंने आज सीखा है दोस्तो।  हारने की वज़ह, मेरी घमंड भरी उम्मीद थी।। हार कभी सोचा नहीं, जिंदगी में जीत ही मंजूर थी । यह मेहनत का फल कैसा, मेरी जिन्दगी झकझोर दी

विश्वासघात हिंदी कविता/hindi poem on vishwasghat

विश्वास नहीं है   जरा सम्भल कर चलें, ग़र दर्द चोट का सह नहीं सकते। लोग कब बदल जाएं, हम कुछ कह नहीं सकते।। आज कोई नजर नहीं आता, आदमी भरोसे का। विश्वास का प्रमाणपत्र, कहीं कोई दे नहीं सकते।। किसी की जीभ कब पलट जाए कुछ बोलकर, क्या करोगे? वैसे हम तो यह दर्द सह नहीं सकते।। सही होगा रास्ता बदल दें, बीच रस्ते में गढ़े उस पत्थर से। न तो वह कितना दर्द देगा, कुछ कह नहीं सकते।।

बच्चों के लिए नई कविताएं

पापा जी   तपती धूप में खुद तप कर, बच्चों को देता छाँव । पढ़ा लिखा कर शहर भेजता, खुद रहता है गाँव ।। गर्मी में नहीं गर्मी लगती, नहीं सर्दी में काँपा । कोई और नहीं होता वह मानव, वह होते सबके पापा ।। ………………………………………………………………. जानवर पापा एक अध्यापक ने बच्चे से, पूछा सवाल कक्षा में। जानवर के कितने पैर? दो बताये बच्चा ने।। अध्यापक बोला, पैर दो नहीं चार हैं। जी पता है, पर चार पैर वाले तो इंसानो से भी होशियार हैं।। आपने तो बताया था, कि जानवर के दिमाग नहीं होता। बच्चे पैदा करता है, पर विबाह नहीं होता।। तो मेरे पापा, भी क्या कम हैं। माँ मेरे पास है, मेरे पापा गुम हैं।। तो कोई अतिश्योंक्ति नही, इन्हे जानवर कहने में। ऐसे दो पैर वाले जानवर से तो अच्छा है, माँ के साथ रहने में।।

zakham dete ho

     जख्मी दिल गजल हम अतीत की चोटों से, आज बहुत सम्भल गए। गुनाह-ए-कर्म तो उनके थे, मोहरा हम बन गए।। ज़ख्म पर मरहम, तो सिर्फ दिखावा था उनका। असल में ज़ख्म तो, पैरों तले वे खुद कुचल गए।। जब भी मिले, शराफत की आड़ में नजर आए। ऊंगली करी किसी ने, तो जनाब उछल गए।। हर मुलाकात मतलबी थी, उनकी हमसे मिलने की। पर्दा हटा के देखा, तो आस्तीन के साँप नजर आए।। हवाला दे ड़ाला उन्होंने, तमाम गवाहों का। कभी ताज थे सिर के, आज पैरों तले नजर आए।। शर्म चहरे पर लिए, घुटने टेक मिलने, इस कदर आए। गुनाह फिर भी कमबख्त इस दिल का, मुझे फिर से वे अपने नजर आए।। ✍️

सैनिक हिंदी कविता/best poem on sainik

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मैं सैनिक हूँ, फर्ज सैनिक का क्या भुला सकता हूँ?  किसी को क्या पता मैं देश की खातिर, किस हद तक जा सकता हूँ।। भुलाता हूँ तो सिर्फ़ मैं अपने बुढ़े माँ-बाप, पत्नी, दोस्त और बच्चे। और वो यादें जो लौटते वक़्त, मेरी बेटी ने रोकर कहा पापा जी नमस्ते।। गजब देशभक्ति परिवार भुला के आ गए । अजीब विडंबना अगले, अवकाश पर बेटी ने कहा, मम्मा ! अंकल जी आ गए।। क्या खूब दिल में यादों की हलचल, और दुश्मन के प्रति कोहराम होता है। मैं जागता हूं रातभर तो क्या, मेरा देश तो सोता है।। हमारी जान हाजिर आपके लिए, सिर्फ आपसे उम्मीद का इक सहारा है। मिलें जिंदा या कफन में, बस गर्व से कहना कि मेरा फौजी भाई आ रहा  है।।  जय हिंद                       

व्यस्तता हिंदी कविता/best poem on time

आज अमन चैन संतोष, सबका खो गया है। हर आदमी लगता है, जैसे मशीन हो गया है।। जिसे पूछो, तपाक से कहता है समय नहीं है। दौड़ने में लगा है, मंज़िल सुनिश्चित नहीं है।। पैसे खातिर पसीना, तो कभी ईमान बेचता है। तब हद हो जाती, जब अपनी जान बेचता है।। दो वक़्त खाने खातिर, क्या क्या झेलता है। कभी पेट भी न भरता, जबकि पूरा खेल पेट का है।। थम्म! ठहर! सोच! यह अनावश्यक दौड क्यों? वज़ह? सिर्फ इतनी कि लोग कर रहे हैं, तो ऐसी होड़ क्यों? वक़्त रहते पहिचान अपने आप को, वरना देर हो जायेगी । मैं कौन हूँ? का ज़वाब पाने में सारी जिंदगी गुजर जायेगी ।।

हिंदी भाषा पर कविता/best poem on hindi

हम आजाद हुए अंग्रेजों से, पर मन में गुलामी बाकी है। क्यों आज भी ऐसा लगता है, जैसे हिंदी इंग्लिश की दासी है।। हम ठगे ठगे से लगते हैं, अपने पर ही अभिमान नहीं। हम ज्ञान समझते इंग्लिश में, पर हिन्दी का कोई सम्मान नहीं।। हम आजाद हुए अंग्रेजों से, पर मन में गुलामी बाकी है। क्यों आज भी ऐसा लगता है, जैसे हिंदी इंग्लिश की दासी है।। कितना कुछ दिया है हिन्दी ने, भगवतगीता रामायण भी। प्रतिभा संपन्न हिन्दी मेरी, सर्वश्रेष्ट कर्तव्यपरायण भी।। पर्याय, मुहावरे छुपे हुए, क्या गज़ब की अतिश्योंक्ति है। क्या खूब मीठे स्वर संबाद लिए, और स्नेहपूर्ण अभिव्यक्ति है।। हार्दिक प्यार छलकता है, मेरे हिंदी अभिवादन में। वहीं रुखापन है इंग्लिश के, हैलो, हाय, सोरी और पार्डन में।। मत चकाचोन्ध में आकर के, जननी की भाषा भूलो तुम। न गरिमा कम हो भाषा की, चाहे बेशक शूली झूलो तुम।। (सूचनार्थ : भगवतगीता और रामायण का इस्तेमाल कविता की जरूरतानुसार किया गया है हालांकि दोनों महाग्रंथों की भाषा संस्कृत’ है।)

अल्पभाषी हिंदी कविता/ineresting poem on hindi

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कम बोलना कमजोरी नहीं अदा हो सकती है। अल्पभाषी पर भी आलिया फिदा हो सकती है।। ज्यादा बोलना राज खोलना सच ही कहा सभी ने। नाकाम हुए इरादे उजागर किए हमीं ने।। वक़ता से अच्छा श्रोता, बताया सभी ने। तुमने ज्ञान बांटा जिनको मूर्ख बनाया उन्हीं ने।। “चुप की अदा” भी अपने आप में सब बता जाती है। न तो “एक मुस्कराहट” क्यूँ दिल पर गहरी छाप छोड़ जाती है।।

best English Poem for kids/fairy

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Fairy English poem  I am fairy , I am fairy. Just come from sky. I,ve two feather. So I can fly to so heigh. And I,ve a magic stick. I can do everything even live and die.

Jan Lokpal Bill ।। जन लोकपाल बिल। kavita kunji

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#viralpoem #janlokpal #anna #janlokpalbill जनलोकपाल ।। Janlokpal सत्ता और जनतंत्र में बस एक अदा पाई गयी। रामलीला मैदान में बारह दिन सच की खाल खिंचवायी गयी।। सत्ता में बैठे सियासती रसिया लोग हँसते रहे।  थोथले मुँह फालतू संसद में बकते रहे।।  किसी ने अन्ना पर तो किसी ने टीम पर निशाना साधा। ‘बी जे पी’ दूल्हा की मौसी बन उठा रही थी फायदा।। अंततः सरकार घुटने टेक सामने आयी। अग्निवेश जी महाराज ने दोहरी भूमिका निभायी।। अन्ना के हर वायदे पर सरकार हाँ भरती गयी। खिलाफ जनता के वास्ते एक नयी चाल चलती गयी। चंद लम्हों बाद उस पर धुंध सी छाने लगी। जनलोकपाल के तीन बिंदुओं पर खोर खाने लगी।। सोनिया जी फोन पर मनमोहन को समझाने लगी। अन्ना की खिदमतगीरी वाकी को फ़साने लगी।। अन्ना काबिलेतारीफ बेफ़िक्र सीढ़ियां चढ़ता गया। अहिंसा की राह पर बंदेमातरम कहता गया।। बारह दिन भूखा रहा तीक्ष्ण तपती धूप में।           आज देश नमन करता उसे गाँधी के रूप में।।               

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ/beti bachao beti padhao/best poem for sociol awareness/girls education

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ बेटों को तुम दिन कहते हो, बेटी की तुलना रात क्यों है । मेरा बेटी होना गुनाह बताएँ, न तो पक्षपात क्यों है ।। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ , यह मात्र स्लोगन जैसा है । बेटी का जिम्मा गृह कार्य, बेटों का बिजनेस में हिस्सा हैै।। बेटे की मित्रमंडली अच्छी, तो बेटा स्वभाव से अच्छा हैै। बेटी गर फोन पर बात करे, तो चरित्रहीन का ठप्पा है।। मन में बेईमानी सी है, न तो दोहरा मापदंड क्यों हैै। हर जगह बेटियाँ हैं आगे, फिर बेटी घर में बंद क्यों है।। विकास समाज का चाहते हो, तो सपने में उन्हें उड़ने दो। लक्ष्मण रेखा मत खींचो, अब काली भी उसे बनने दो।।

महान हिंदुस्तान/best poem on patriotic/deshbhakti song

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महान हिंदुस्तान हर समय झुठलाते रहे, अपने बल के गुमान में। कभी प्यार की वाणी न बोली, बंदूक की तान में।। क्या मज़ाल किसी की, इनके सामने जो जाता, सर्वशक्तिमान थे, इस पूरे जहाँन में। सिर्फ धोखा देते रहे, भारत को सम्मान में।। आज संजीवनी भीख में मांग रहे, जो बनती हिन्दुस्तान में। हमारे बासुदैव कुटुंबकम वसा है दिल और दिमाग में।। फिर भी दरियादिली देखो, इस महान हिंदुस्तान की। अपनों की छोड़ फिक्र, है उसे भिखारियों के जान की।। हम धर्म उसूलों पर चलते, जो सीखे वेद पुराण में। मत भूल यही वह भारत है, जहाँ जन्म लिया श्री राम ने।।

जिंदगी/best motivational poem on life/

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  किसी को पूछो तो कहता है,कि बस कट रही है । क्या इतनी सस्ती है जिंदगी, जो ऐसे लुट रही है ।। जिंदगी लगती है , आज जलेबी सी है। मीठी तो है पर , उलझन सी है ।। पता ही नहीं लगता,  शुरू और अंत का। आ ज विचार याद आता है, एक संत का ।। जिसने कहा था, कि जिंदगी, दलदल सी है। इसमें एक अंजान, चीज फँसी है ।। इसे जो पहिचान गया, वह पार है। वरना ये दलदल, तो अपार है।।

जानवर पापा/best poem on divorce/effect of divorce on children/

कृषि कानून/best poem on kisan andolan/kisan andolan aj ka/

                          कृषि कानून   कानून बनते हैं बिगड़ते हैं, जनता के कल्याण में। यह कैसा  कृषि कानून, जो स्वीकारा नहीं किसान ने।। जबर्दस्ती थोपने की, आखिर वज़ह कैसी। कानून किसान के हित में दो, फिर कलह कैसी।। खुलेआम तानाशाही है, यह चौकीदारी कैसी। अन्नदाता के हित में, यह वफादारी कैसी।। भूलकर भी मत उकसाओ, जवान और किसान को। ऐसे नियम कानून बनाओ, जिससे फायदा हो इंसान को।। विपक्ष को मौका मत दो ऐसा, तिल का ताड़ बना डाले। सरकार पे दोशारोपण करके, देश में आग लगा डाले।। वक़्त के रहते चिंतन करके, कानून में फेरबदल कर लो। मौका है खुश करो किसान को, वोटों से झोली भर लो।। सोचो किसान के हित में, करो विपक्ष की मिटियामेट। न तो फिर पछताने से होत क्या, जब चिड़ियाँ चुन गयीं खेत।।   ✍️ 

Dhokhebaj, धोखेवाज, dhokhewajhindi kavita kunji

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धोखेबाज  मेरी जिन्दगी का हर रिश्ता, बड़ा खास निकला। जिसे भरोसे का समझा, वही धोखेबाज़ निकला।। यहाँ तक कि खून के रिश्तों ने तो कमाल कर दिया। कुछ रिश्ते शरीक माने जाते थे, उन पर भी सवाल कर दिया।। सीना छप्पन इंच का अमूमन वही बताते हैं। जो मतलब के लिए थूक कर चाट जाते हैं।। समाज़ मे क्या औकात है, क्या करना बस मतलब निकले। चलो वह शख्स मान्य है, जो मर्द के चोले में औरत निकले।। गज़ब कलयुग है हर रिश्ते में पल पल पर धोखा ही धोखा। ये देख ताज्जुब था, जब पड़ोसी की दो रोटी खा कुत्त्ता अपने मालिक पर भोंका।। क्या कहेंगे कौन बुरा कौन अच्छा, कौन झूटा कौन सच्चा। किस पर यकीन करोगे, आदमी औरत जानबर या बच्चा।। मेरे ख्याल से सब सही, गलत हम स्वम हैं। विश्वास करने में कान के साथ, आँख का भी रोल अहम हैं।। कभी कभी ऐसी परिस्थिति भी हो सकती है। आँख से टपक रहे आँसू में, मिलावट भी हो सकती है।। ऐसे में निर्णय करें दिल का सहारा लेके। वरना हर किसी को शक की नजर से ही देखें।।

Free Fall Jump । Sky Diving । फ्री फॉल जंप करने वाले हमारे वीर सैनिकों पर एक अदभुत कविता

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#freefall #skydiving #commando #garud commando #Marcos commando Free Fall Jump । सबके दिल को हिला देने वाली एक साहसिक कविता   Listen on YouTube जरा सोच कर देखें, अपने साहस के किस्से। तुम ज़मीं छोड़ आसमाँ के बन रहे हिस्से।। तुम सीना तान के वहां, वन थाऊजेंड़ टू थाऊजेंड़ चिल्ला रहे हैं। जहाँ आसमाँ के पंछी, जाने से कतरा रहे हैं।। क्या खूब तुम्हारी, मौत से डील है। 'जिन्दगी’ छतरी में फसी छोटी सी कील है।। पूरा गेम गरम जोशी और साहस का है। वरना छोटी सी भूल बहुत बड़ा हादसा है।। उस्तादों ने ऎसे गुरमंत्र दिये सूरता के। चीर दो आसमाँ किस्से लिख दो वीरता के।। निक्षुब्ध आसमां में बजती धुन बिन शंख के। तुम क्या खूब परिंदे हो उड़ते हो बिना पंख के।। क्या खूब आसमाँ की बुलंदियों में झूलते हो। अजीब एहसास उस क्षण का जब फाइव थाउजेंड़ के बाद पुल बोलते हो।। तुम्हारे सीने से टकरा कर, हवा भी अपना रुख बदलती है। तुझको उड़ते देख योद्धा, सारी दुनियाँ सल्यूट करती है ।। Listen On Youtube