Fauji Ki Patni Ka Dard | Heart Touching Poetry in Hindi ⭐
❄️🌙 ग्लेशियर में तैनात फौजी की पत्नी की व्यथा 🌙❄️
झूठ बोल रोज़ दिल बहला रहे,
खुद तकलीफ़ में हो, और हमें हँसा रहे।
आख़िर तुम हो कहाँ, सच क्यों नहीं बता रहे,
हर बार “मैं ठीक हूँ” कहकर बात घुमा रहे।
हाल-चाल बताने में कुछ तो छुपा रहे,
तुम्हारी चुप्पी से ही, सारे राज खुल जा रहे।
व्हाट्सएप की डीपी में जबरन मुस्करा रहे,
आंखों में छलकते प्यार से, हम सबको रुला रहे।
कड़ाके की ठंड में चार बजे उठ जा रहे,
बर्फ में मेरे पिया कैसे जीवन बिता रहे।
वहां तो धरा के पंछी भी, जाने से घबरा रहे,
देश की खातिर ए 'धर्म', तुम क्या क्या सह जा रहे।
सुना है हालत देश के दिनोंदिन बिगड़ते जा रहे,
बच्चे रोज पूछते हैं मम्मी! पापा कब आ रहे?
क्या बताऊं मैं उन्हें महीने गुजरते जा रहे,
कमबख्त मोबाइल से बच्चे बिगड़ते जा रहे।
पड़ोस वाले गुप्ता जी रोज बच्चे घुमा रहे,
हमारे घर के सामने रोज ठुमक्के जा रहे।
ऊपर से हमें उल्टा ज्ञान का पाठ पढ़ा रहे,
फौजी से क्यों शादी कर बैठी हमें समझा रहे।
वाह! गुप्ता जी ढांढस बंधाने के बजाय मेरी हिम्मत हिला रहे,
मेरे हमसफर की बदौलत तुम चैन से सो पा रहे।
तुम मानते हो मुझको आभागिन, मगर गर्व है मुझे अपने आप पर,
तुम भी तो हो भारतीय, जरा आओ वहां एक रात काट कर।

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