मृत्यु एक सत्य है।। Mratyu ek satya hai
मृत्यु एक सत्य है' तो सत्य को स्वीकार लो।
मृत्य निश्चित है सभी की, जीवन सुधार लो।।
दूसरों का दिल दुखा के जिए भी तो क्या जिए।
वह मौन है आज अनुकूल समय के लिए।।
पथभ्रष्ट हुई मनुष्यता निज स्वार्थ के लिए।
नहीं रह गया है धनी आदमी,अपनी बात के लिए।।
सत्य का कत्लेआम करती दोगलों की एकता।
विश्वास की धज्जियां उड़ाते चंद स्वार्थ के लिए।।
आम हो गया सॉरी बोलना बात बात के लिए।
मित्रता हुई कलंकित विश्वासघात केलिए।।
मुश्किल हुआ है ढूंढना विश्वासपात्र अब यहां।
हैवान बन चुका इंसान, खुद इंसान के लिए।।
