Two lines shayari।। दो लाइन शायरी
जैसा हम सोचते हैं हर कोई वैसा नहीं होता।
हर इंसान एक जैसा नहीं होता।।
जिसके पास हौसले हैं उड़ान भरता है।
और हरामी सिर्फ शिकायत करता है।।
पत्नी की पहचान विपत्ति में,भाई की, संकट आने पर।बहिन बने बच्चों का सहारा,भाभी के मर जाने पर।।बेटे की, परख बुढ़ापे पर,बेटी की, मर्ज सताने पर।दोस्त की, घोर गरीबी में,मां बाप की, बच्चों को सफल बनाने पर।।-कविता कुंजी
दिल तोड़कर क्या खूब जश्न मना रहे हो,
हमारी बर्बादी पर महफ़िलें सजा रहे हो।
कल तक जो कहते थे जान हो हमारी,
आज उसी मोहब्बत को तमाशा बना रहे हो।
-कविता कुंजी
तेरा हंसना भी चुभने लगा जालिम ए शातिर,हम सब कुछ लुटा चुके हैं बेवफा तेरी खातिर।
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