NEET Paper Leak: Jantar Mantar Par Umda Sailab | जनता में आक्रोश - कविता कुंजी
क्या करना ऐसी सरकारों का, जो जनता का कत्लेआम करे।
शासक को कोई परवाह नहीं, अब्दुल चाहे श्याम मरे।।
हालात भयावह होते हैं, जब कन्याएँ पीटी जाती हैं।
वोटबैंक के खातिर कुछ, पॉलिटिकल पार्टियाँ साथ निभाती हैं।।
न्याय अगर सो जाता है, अन्याय वहीं मुस्काता है।
सत्ता के मद में चूर हुआ, जो मानवता को ठुकराता है।।
धर्म, जाति के नामों पर, जब नफ़रत का व्यापार चले।
टुकड़ों में बँट जाता देश, फिर कैसे घर-परिवार चले।।
जहाँ राजधर्म का मान नहीं, वह सिंहासन बेकार लगे।
जनहित को कुचला जाए, ऐसे शासन में आग लगे।।
सिंहासन केवल उसका हो, जो हर जाति धर्म का सम्मान करे।
न्याय रहे हर एक द्वार पर, ऐसा भारत निर्माण करे।।
न हिन्दू हारे, न मुस्लिम हारे, जीते केवल इंसान यहाँ।
भारत माँ की शान बढ़े, गूँजे ऐसा जयगान यहाँ।।
सत्ता सेवा का नाम बने, न कुर्सी का अभिमान बने।
जनता सबसे ऊपर हो, यही राष्ट्र की पहचान बने।।
सत्ता का अर्थ न कुर्सी हो, सत्ता जन-उपकार बने।
हर निर्बल की रक्षा करके, शासन का सत्कार बने।।
जिस धरती पर बेटी रोए, वह कैसा लोकतंत्र होगा।
जहाँ न्याय बिके चौराहों पर, वहां कैसा राजतंत्र होगा।।
शासन का पहला धर्म यही, हर जन का सम्मान रहे।
अब्दुल हो या श्याम कोई, सबका जीवन महान रहे।।
कलम उठे तो सत्य लिखे, हर अक्षर में स्वाभिमान रहे।।
न कोई शासक न सत्ता, सबसे ऊपर हिंदुस्तान रहे।।

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