Dharti Bhi Ro Padi | Nasha Pyar Ka Nahi Haiwaniyat Ka | Bolti Kavita
“धरती भी रो पड़ी” 🔥
Nasha pyar ka।। नशा प्यार का
आज एक दरिंदे ने कलियुग में ऐसा कुक्रत्य किया,
घटना इतनी भयावह थी कि खुद धरती ने तांडव नृत्य किया।
दिन दहाड़े मासूमियत रौंदी गई, नहीं किसी ने रोका उसको,
उठा उठा के फेंक रहा था नहीं किसी ने ठोंका उसको।
डेढ़ साल के इस बच्चे का आखिर क्या दोष रहा होगा,
पटक पटक के मारा उसको, कैसे दर्द सहा होगा।
चीखा होगा, रोया होगा, पर विरोध नहीं कर पाया होगा,
देख मासूमियत उस बच्चे की, हे!मानव क्यों नही दहलाया होगा।
उठा-उठाकर फेंका उसको,जैसे वो कोई चीज़ रहा,
धरती काँपी, अम्बर रोया, मानव कितना नीच रहा।
चीखें उसकी मंदिर पहुँचीं, मस्जिद तक फरियाद गई,
जब बच्चे की टूटी साँसें, मानवता शर्मसार हुई।
जब मां को पता चला होगा तब क्या मां पे बीती होगी,
दुख के महासागर में मईया कैसे जीती होगी।
देख लाल का विकृत चेहरा मईया कितनी रोई होगी,
बिना लाल के सूनी छाती, नहीं रात को सोई होगी।
देख लाल के खेल खिलौने मईया का दिल टूट रहा,
कोस रही भगवान को बैठी क्यों तू मुझको लूट रहा।
गूंज रही है मेरे कान में मेरे लला की किलकारी,
फिर से चक्र घुमा दे कान्हा, न बच पाए वह अत्याचारी।
- कविता कुंजी

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