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नौकरी में चापलूसी नहीं, कर्तव्यनिष्ठा ज़रूरी है | दमदार हिंदी कविता | कविता कुंजी

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गुनाह गर वो करें, तो सब क्षमा -ए- भूल समझें। हुक्म को तोड गर आगे बढ़ें, तो उन्हें मजबूर समझें।। वे जो चाहें सो करें, और बेखौफ करते रहें। हमारी छोटी भूल भी, गुनाहों में गिनते रहें।। क्या गजब की कूटनीति, दुतरफा दगा -ए- खेल है। किसी के दोनों हाथ घी में, तो किसी का तेल है।। हम सीधे साधे चले, इस जिंदगी की राह में। हम भी नंबर वन बनें, मेहनत करी, इस चाह में।। मगर यहां मेहनत नहीं, चापलूसी का गेम है। हमने लस्सी दी बॉस को, मगर उसे तो पसंंद जैम है।। बस सुबह से शाम ही हुई, कि बॉस भी बदले नज़र आए। जिस पर हक़ था हमारा, वहां कोई और नजर आए।। आज लगता है शराफ़त गई तेल लेने, सिर्फ झूठ का सहारा है। मेहनती खाता टुकाई और हरामी तारीफ पा रहा है।।

नवयुवक कविता/best poem on youngester/newgeneration hindi poem/kavita kunji

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नवयुवक जीवन की एक अवस्था है, न जवान, नहीं वह बच्चा है। न घर में जोर किसी का है, उसकी मनमर्जी की इच्छा है।। कुछ बोध अधूरा सा रहता, ऊर्जा में ओतप्रोत रहता। फिर भी बल बुद्धि से कच्चा है, उसकी मनमर्जी की इच्छा है।। जीवन की एक अवस्था है, न जवान, नहीं वह बच्चा है। नई नई जवानी, नवयुवक, हर रोज़ बदलता नए लुक।। मोहब्बत का नशा भी कम नहीं है, दुनिया से लडने की दम नहीं है।। प्यार का शोला है दिल में,पर दिल तो तेरा कच्चा है, उसकी मनमर्जी की इच्छा है। जीवन की एक अवस्था है, न जवान, नहीं वह बच्चा है।। है जीवन की यह अजीब मोड़, आगे बढ़ने की लगी होड। है जज्जवा दिल में कुछ करने का, मत बहक न बन, मोहरा छलने का।। नवयुवक तू दिल का सच्चा है, उसकी मनमर्जी की इच्छा है।। जीवन की एक अवस्था है, न जवान, नहीं वह बच्चा है। न घर में जोर किसी का है, उसकी मनमर्जी की इच्छा है।।

Chaplusi Chhodo, Kartavya Nibhao | Powerful Hindi Kavita

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चापलूसी आज सांप बेरोजगार हो गए , क्यूंकि आदमी काटने लगे। ये देख कुत्ते भी अचंभित है , कि तलवे आदमी चाटने लगे। तुच्छ स्वार्थ वास्ते कितना गिर गया इंसान, घर की इज्ज़त को बॉस के सामने बिछाने लगे। दोस्त की परिभाषा दूषित सी हो गई, आज दोस्त भी दूसरा मुखौटा लगाने लगे। चुगली की परंपरा तो वर्षों पुरानी है, पर आज मर्द भी इस परंपरा को बख़ूबी निभाने लगे। मुश्किल है सत्य और झूठ में भेद जानना, विश्वास की चासनी से झूठ को सत्य ठहराने लगे। समाज की जड़ें खोखली आज होती जा रहीं, खुद के बच्चे संभलते नहीं पर देश को समझाने लगे। घर में भी सुरक्षित नहीं रहे ‘धर्म’ आज, घर में ही आस्तीन के सांप नजर आने लगे।

सर्वश्रेष्ठ हिन्दी कविताएं, best poem, वक्त का पहिया - waqt Ka pahiya।। Tanashahi

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तानाशाही जवानी के शहंशाह, बुढ़ापे में लाचार देखे, बड़े बड़े तीरंदाज भी, हमने तारतार देखे। गर्व था जिन्हे अपनी हुस्न ए जवानी पर, ऐसे लोगों के भी हाल, बेहाल देखे ।। दौलत थी बेशुमार, खरीद सकते थे हिन्दुस्तान को, ऐसे लोग भी चौराहे पर, कटोरे के साथ देखे। कुछ लोग मर्दानगी, औरतों पर दिखाते रहे, ऐसे मर्द भी औरत के आगे लाचार देखे।। कभी चमड़े के सिक्के जिन्होंने दुनिया में चलाए, वे लोग भी गिड़गिड़ाते, सालोंसाल देखे।। ये वक्त का पहिया है, निरंतर घूमता रहता सदां, तभी तो जो कभी कंगाल थे, वे आज मालामाल देखे।। ************************** औरत जिसके खातिर बनाई गई हूं, उसी के द्वारा सताई गई हूं। जब भी जरूरत पड़ी जो किसी को, मैं सोए में अक्सर जगाई गई हूं।। हवस की निगाहों से सबने देखा , जब भी बाजार से आई गई हूं। जब भी महफ़िल सजाई किसी ने , चटाई समझ के बिछाई गई हूं।। जिसने खुश रखने का दामन जो थामा, उसी के द्वारा रुलाई गई हूं। क्यों मैं शिकायत करूं जो किसी से, खुद अपनों के द्वारा सताई गई हूं।। धंधे की गुणवत्ता छूपाने के वास्ते, नुमाइश का हिस्सा बनाई गई हूं। गुनाह सिर्फ मेरा औरत जो होना, यही जलील देके चुप करा...