Pakhand ।। पाखंड पर सर्वश्रेष्ठ कविता
पाखंड मां दुर्गा, शिव, कालिका, तो किसी पे हनुमान प्रचंड। चमत्कार के नाम पर, फलफूल रहा पाखंड।। फलफूल रहा पाखंड दक्षिणा मोटी पाते। लुटने के उपरांत बेचारे फिर नहीं जाते ।। इस घटना का जिक्र नहीं किसी को बतलाते। पड़ोसी भी लूट जाए, इलाज चोखा बतलाते।। लुट जाने के बाद पड़ोसी दोनों मन मुस्काते। फिर तृतीय शिकार को ये दोनों देखो कैसे समझाते।। भाई घंणा होता चमत्कार सभी चकित हो जाते। वहां लंगड़ा करता जंप गूंगे से इंग्लिश बुलवाते।। जाके देख दरबार बदल जायेगी काया। हाथ दबाके पड़ोसी का, फिर आंख मार मुसकाया।। गया बेचारा दरबार मिल गया दल्ला फेरी। कटा पांच हजार की पर्ची, अर्जी पहली तेरी।। जाके बैठ गया दरबार खाली कर अपनी थैली। बाबा ने किया चमत्कार लगा दी अर्जी पहली।। आजा रामभरोसे तेरे घर काली छाया। मरने से तीन बार बचा तू, मौत तेरी निश्चित भाया।। गिर पड़ा बाबा के पैर बचा लो किस्मत मेरी। बाबा ने कान मे कहा, मिला! तू हां में हां मेरी।। चटकी बिल्कुल नहीं, न तो फिर होगा भंगड़ा। बाबा के एक इशारे पर बाउंसर आ गया तंगडा।। फिर ...